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Bureaucrats Magazine – Breaking News-Devyani Singh : देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा पास करना लोहे के चने चबाने जैसा है. लेकिन कई एस्पिरेंट्स सही रणनीति और अपनी मेहनत के बल पर शानदार सफलता भी हासिल करते हैं. इनमें से ही एक हैं हरियाणा की रहने वाली खूबसूरत आईआरएस अधिकारी देवयानी सिंह.#BureaucratsMag

Bureaucrats Magazine – Breaking News-Devyani Singh हरियाणा की रहने वाली आईआरएस अधिकारी देवयानी सिंह ने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा सप्ताह में दो दिन पढ़ाई करके पास किया है. उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई चंडीगढ़ से की है. इसके बाद साल 2014 में बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी बिट्स पिलानी के गोवा कैंपस से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. #BureaucratsMag

Bureaucrats Magazine – Breaking News-Devyani Singh देवयानी सिंह ने इंजीनियारिंग में ग्रेजुएशन के बाद इंजीनियरिंग फील्ड में जाने की बजाए प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखा. उन्होंने इसकी तैयारी भी शुरू की. साल 2015 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी. लेकिन असफल रहीं. इसके बाद उन्हें लगातार 2016 और 2017 में भी असफलता ही हाथ लगी.#BureaucratsMag
Bureaucrats Magazine – Breaking News-Devyani Singh देवयानी सिंह ने अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा क्रैक कर पाने में कामयाब रहीं. वह अपने पहले दो प्रयास में तो यूपीएससी प्रीलिम्स भी क्वॉलिफाई नहीं कर पाई थीं. जबकि तीसरे प्रयास में वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंची थीं. लेकिन सेलेक्शन नहीं हुआ था. देवयानी ने साल 2018 में अपना चौथा अटेम्प्ट दिया.#BureaucratsMag

Bureaucrats Magazine – Breaking News-Devyani Singh चौथे अटेम्पट में उन्होंने ऑल इंडिया 222वीं रैंक के साथ यूपीएससी क्रैक किया और आईआरएस अधिकारी बन गईं. उनकी नियुक्ति सेट्रल ऑडिट डिपार्टमेंट में हुई. जिसके चलते उन्हें सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही पढ़ने का मौका मिल पाता था. उन्होंने साल 2020 में यूपीएससी का एक और अटेम्प्ट दिया. इस बार उनकी ऑल इंडिया 11वीं रैंक आई.#BureaucratsMag

Bureaucrats Magazine – Breaking News-Devyani Singh देवयानी सिंह हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली हैं. उनके पिता विनय सिंह आईएएस अधिकारी हैं. वह अपने पिता को ही अपनी प्रेरणा मानती हैं. देवयानी सिंह सोशल मीडिया पर काफी फेमस हैं. इंस्टाग्राम पर उनके एक लाख से अधिक फॉलोवर हैं. वह अभी आयकर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर हैं.
]]>Vijay Vardhan has shown that one’s success is not determined by one’s failures. Making mistakes is a part of the success mantra. But, it is equally important that you do not justify your mistakes. Instead try to find out why the results did not come as expected. Vijay failed in 35 government exams. But these failures did not deter him for an iota. He died only after passing the examination of the collectorate. His story inspires millions. Come, let’s know about them here.

hold on to hope......Focus on accepting failures and moving on from them. If you work with dedication and honesty, you will definitely get success. Where some people get disheartened after failing in one or two exams. On the other hand, Vijay Vardhan, who belongs to Haryana, kept the thread of hope in spite of failing in 35 government exams He repeatedly failed in the examinations for government jobs. But, did not give up. Finally in 2018, he got success in securing 104th rank in UPSC.
Bureaucrats Magazine - Breaking News-keep learning from mistakes......Vijay Vardhan was not disheartened by repeated failures. However, keep learning from your mistakes. After every failure, he was evaluated honestly. He got elected as the first IPS officer. But, were not satisfied with this. He tried more. After all, he proved himself as an IAS officer.

Engineering in Electronics......]]>

Bureaucrats Magazine – Breaking News –टीना डाबी ने दिल्ली के जीसस एंड मैरी स्कूल से पढ़ाई की है. उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में पॉलिटिकल साइंस औऱ हिस्ट्री में पूरे 100 फीसदी अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में एडमिशन लिया. यहां से उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है.

Bureaucrats Magazine – Breaking News –गौरतलब है कि लेडी श्रीराम कॉलेज देश का जाना-माना कॉलेज है और दिल्ली विश्वविद्यालय के इस कॉलेज में एडमिशन के लिए कॉम्पटीशन भी काफ़ी अधिक रहता है. यह देश के टॉप कॉलेजों में शामिल है. एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 में कॉलेजों की लिस्ट में इसे देशभर में 9वां स्थान दिया गया है.

Bureaucrats Magazine – Breaking News –बता दें कि लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन में दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों की तरह ही सीयूईटी यूजी के आधार पर एडमिशन दिया जाता है. इसमें एडमिशन लेने के लिए आपको सीयूईटी आवेदन पत्र में इसके कोर्स का चयन करना होगा और संबंधित विषयों की परीक्षा में शामिल होना होगा. सीयूईटी स्कोर के आधार पर आप काउंसिलिंग प्रक्रिया में शामिल होकर इसमें एडमिशन ले सकेंगे.
#BureaucratsMag- लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन की ख़ास बात यह है कि इसकी शिक्षा व्यवस्था बेहतरीन होने के बावजूद यहां की फीस काफी कम है. ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आने वाली महिलाएं भी इसमें एडमिशन ले सकती हैं. यहां की फ़ीस की बात करें तो लेडी श्रीराम कॉलेज में 45,000 रुपये से लेकर 1.60 लाख रुपये तक की फीस में सभी यूजी, पीजी एवं सर्टिफिकेट कोर्स किए जा सकते हैं. इस कॉलेज में बीए, बीएससी समेत कई प्रमुख यूजी पीजी कोर्स संचालित किए जाते हैं.
]]>IAS Isha Duhan: तेज–तर्रार IAS अफसरों में होती है गिनती
हम बात कर रहें है महिला आईएएस ईशा दुहां (Isha Duhan) की, जो अभी हाल ही में यूपी के चंदौली जिले की की नई डीएम बनी है। ईशा दुहन की गिनती तेज-तर्रार आईएएस अधिकारियों में होती है। ईशा 2014 बैच की IAS Officer के रूप में बतौर डीएम पहली पोस्टिंग है। इससे पहले वह असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के रूप में मेरठ, मुख्य विकास अधिकारी के पद पर बुलंदशहर और मेरठ में काम कर चुकी हैं और वर्तमान में वाराणसी में वाराणसी विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष पद पर कार्य कर रही थी। ईशा की गिनती तेज–तर्रार आईएएस अफसरों में की जाती है तथा उन्हे कड़ी फैसले लेने के लिए जाना जाता है। अभी हाल ही में हुए तबादलों में ईशा दुहन (IAS Isha Duhan) को चंदौली की कमान सौंपी गयी है
हरियाणा की रहने वाली हैं IAS Isha Duhan
हरियाणा के पंचकुला की रहने वाली ईशा दुहन ने पटियाला से बी टेक बायोटेक्नोलॉजी करने के बाद सिविल सर्विसेज़ के क्षेत्र में जाने का निश्चय किया और पहले ही प्रयास में 59वीं रैंक हासिल किया। वाराणसी में लेडी सिंघम के नाम से मशहूर ईशा दुहन का नाम भू माफियाओं के लिए बुरे सपने से कम नहीं था

भू माफियाओं से अकेले लिया था लोहा

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बतौर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट वाराणसी के राजातालाब की SDM रहने के दौरान सरकारी तामझाम से दूर IAS Isha Duhan 2017 में अकेले ही खनन माफियाओं से लोहा लेने निकल पड़ी थी। ग्रामीणों की मदद से उन्हें पकड़ भी लिया। इसके अलावा राजातलाब तहसील में एसडीएम पद के दौरान एक व्यक्ति द्वारा पान खाकर उनके कक्ष में घुसना उसे भारी पड़ गया था। आईएएस ईशा दुहन ने उसे फटकारते हुए उसपर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

IAS ईशा दुहन का 17 अप्रैल 2018 को बनारस से तबदला हुआ था। उन्हें बुलंदशहर का सीडीओ बनाया गया था। ईशा दुहन ना सिर्फ एक तेज-तर्रार IASअफसर हैं, बल्कि वाराणसी जिला प्रशासन की ये युवा सदस्य भविष्य की काशी के निर्माण संबंधी योजनाओं में अहम भूमिका निभा चुकी हैं।
वीडीए उपाध्यक्ष रहने के दौरान कई अवैध निर्माणों पर बुल्डोजर चलवा चुकी हैं। दबंग लेडी IAS अफसर ईशा दुहन की जनता में छवि जनप्रिय अधिकारी के रूप में है। ईशा दुहन अपने पिता से काफी प्रभावित रहीं हैं। इनके पिता ईश्वर दुहन आईटीबीपी में डीआईजी रह चुके हैं।

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद सरकार घिरी हुई है। विपक्ष लगातार जांच की मांग कर रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार मुखर है। उसकी मांग है कि अडानी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में लगाए गये आरोपों पर संसदीय जांच कमेटी से जांच कराई जाए। बजट सत्र में इसको लेकर खूब हंगामा हुआ लेकिन सरकार ने अभी तक इस मांग को नहीं माना है।
इस सबसे इतर सुप्रीम कोर्ट में जांच के आदेश देने के लिए याचिकाएं दायर की गई हैं। अलग-अलग संस्थांये भी अडानी समूह की तमाम मसलों पर जांच कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को एक जांच समिति के गठन का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार द्वारा गठित की जाने वाली जांच समिति कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार की शर्तों पर बनी कोई जांच समिति शायद ही ईमानदारी से मुद्दे की जांज करे। जांच करने की बजाये यह जांच को भटका सकती है। इसका कारण अडाना और मोदी के निजि संबंध हैं। ऐसे में निस्पक्ष जांच की उम्मीद बेमानी है।
उन्होंने कहा कि जो आरोप लगाए गये हैं, वह सत्ता, भारत सरकार और अडानी समूह के बीच आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार द्वारा प्रस्तावित शर्तों के साथ बनी जांच समिति से स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की उम्मीद बहुत कम है।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को हिंडनबर्ग-अडाणी मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ स्तर की समिति के गठन के सुझाव को स्वीकार किया था, इस जांज समिति के गठन पर केंद्र सरकार की भी सहमति थी। सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह जल्द ही समिति के लिए विशेषज्ञों के नाम सुझाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की तरफ से कहा था कि हम सीलबंद लिफाफे में समिति में शामिल किए जाने वाले विशेषज्ञों के नाम सुझाएंगे। याचिकाकर्ताओं द्वारा इन नामों पर चर्चा और विरोध नहीं किया जाना चाहिए। “सुप्रीम कोर्ट सूची में से जांच दल के सदस्यों के नाम चुन सकता है।
रमेश ने समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि मेहता का सीलबंद लिफाफे में नाम देने का सुझाव इस बात को पुख्ता करता है कि प्रस्तावित समिति सरकार और अडानी समूह के संबंधों की वास्तविक जांच को रोकने के लिए पूर्व योजना का हिस्सा है।
उन्होंने 2001 में शेयर बाजार घोटाले सहित कई औऱ महत्वपूर्ण मामलों की जांच में जेपीसी की भूमिका को याद करते हुए कहा कि इन समितियों की रिपोर्टों ने बहुत सारी गलत प्रथाओं को रोकने में सहायता दी। अगर सरकार और प्रधानममंत्री को जवाबदेह बनाया जाए तो जेपीसी के गठन के अलावा और कोई भी जांच समिति लीपापोती के अलावा और कुछ नहीं है।
जयराम रमेश ने जांच समिति के गठन और उसमें सरकार की भूमिका पर अविश्वास जताते हुए सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। उनकी बात एक हद तक सही भी है कि जब किसी गंभीर मामले की जांज करने के लिए संसदीय व्यवस्था में ही प्रावधान किए गये हैं तब सरकार उन समितियों से जांच कराने से भाग क्यों रही है। जबकि ऐसा पहली बार नहीं है कि इस तरह की मांग उठी हो।
लगभग हर सरकार के सामने कोई ऐसी स्थिति आती है जब उसे इस तरह के हमलों का सामना करना पड़ता है। खुद भाजपा जब विपक्ष में थी उसने न जाने कितनी बार कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए जेपीसी से जांच की मांग को उठाया। और सरकार ने भी विपक्ष की बात मानते हुए इसका गठन किया। समिति की रिपोर्टों के बाद कई मंत्रियों को इस्तीफे तक देने पड़े। मोदी की अगुवाई वाली भाजपा में सरकार किसी का इस्तीफा तो छोड़िए, जांच समिति का गठन हो जाए यही बहुत बड़ी बात है।
लोकतांत्रिक परंपरा में पक्ष विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहते हैं, यह राजनिती का हिस्सा है लेकिन किसी गंभीर मसले पर एक दूसरे की बात मानकर आगे बढ़ने की परंपराएं भी रही हैं। और सबको साथ लेकर चलना लोकतंत्र का तकाजा भी है। लेकिन विपक्ष द्वारा सरकार पर इस तरह का अविश्वास भी शायद ही कभी दिखाया गया हो।
]]>पुरुष प्रधान दुनिया में अगर हर महत्वपूर्ण पद पर महिला बैठी हो तो आप क्या कहेंगे? ऐसा हुआ है कानपुर देहात जिले में। यहां इस समय ज्यादातर महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही हैं। डीएम नेहा जैन, एसपी सुनीति, सीडीओ सौम्या पांडेय, कई एसडीएम, बीएसए और जिला पंचायती राज अधिकारी भी महिला हैं। ‘ऑल विमिन टीम’ की सदस्य एसपी सुनीति कहती हैं, किसी महत्वपूर्ण पद पर महिला अधिकारी के होने से समन्वय बढ़िया होता है। कोशिश रहती है कि अच्छा कर पाएं।
बात समझाना होता आसान:
कुछ साल पहले डीएम, एसपी और सीडीओ के पद पर महिलाओं की तैनाती के बाद उन्नाव जिला चर्चा में आया था। बीते दिनों एसपी के पद पर आईपीएस अधिकारी सुनीति की तैनाती के बाद जानकारों की नजर कानपुर देहात जिले पर गईं। अब ज्यादातर महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं हैं। बातचीत में पुलिस-प्रशासन से जुड़ी सारी महिला अधिकारी इस बात पर खुशी जताती हैं। हर अधिकारी का कहना है कि दूसरे किसी पद पर महिला अधिकारी के होने से अपनी बात कहना और समझाना काफी आसान हो जाता है।

अच्छा है समन्वय:
एसपी सुनीति कहती हैं कि मेरी इस बारे में डीएम नेहा जैन से चर्चा भी हुई है। हम चाहते हैं कि चीजें और बेहतर हों। जिले के लिए कुछ अच्छा कर पाना जरूरी है। लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हर चुनौती जीवन का अंग है। वह कहती हैं, जब औरैया में एसपी थी तो बेटा 8 महीने का था। इस वक्त बेटी 9 महीने की है। मैं जिले के साथ परिवार को भी मैनेज कर लूंगी। परिवार के सहयोग से सब कर पा रही हूं।
काम करने में आसानी:
सीडीओ सौम्य पांडेय भी इसे एक अवसर की तरह देखती हैं, वह कहती हैं, महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। मैं भाग्यशाली हूं कि इस टीम का हिस्सा हूं। महिलाओं के लिए बनाए आगे बढ़ रही हैं। मैं भाग्यशाली हूं कि इस टीम का हिस्सा हूं। महिलाओं के लिए बनाए
सेबी ने कहा कि वह बाजार के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदार संस्था होने के नाते बाजार को व्यवस्थित और कुशल कामकाज को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। एक विशेष समूह के शेयरों में चल रही अत्यधिक अस्थिरता को दूर करने के लिए पहले से परिभाषित और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध निगरानी उपायों (एएसएम ढांचे सहित) को लागू कर रहा है। किसी भी स्टॉक की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की कुछ शर्तों के तहत यह तंत्र ऑटोमेटिक रूप से लागू हो जाता है।
स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई ने अडानी समूह की तीन कंपनियों – अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अंबुजा सीमेंट्स को अपने अल्पकालिक अतिरिक्त निगरानी उपाय (एएसएम) के तहत रखा है।
सेबी का यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान के घंटों के भीतर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘अडानी एंटरप्राइजेज पर यूएस-आधारित लघु विक्रेता हिंडनबर्ग के “स्टॉक हेरफेर” आरोपों के बाद 20,000 करोड़ रुपये के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को रद्द करने के बाद भारत की मैक्रो फंडामेंटल और छवि प्रभावित नहीं हुई है। देश की की मजबूत धारणा बरकरार बनी हुई है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि अडानी के मुद्दे पर नियामक अपना काम करेंगे और उनके पास बाजारों की स्थिरता सुनिश्चित करने के साधन हैं। सीतारमण ने कहा कि नियामक सरकार से स्वतंत्र हैं, और “बाजार को अच्छी तरह से विनियमित करने के लिए जो उचित है उसे करने के लिए उन्हें खुद पर छोड़ दिया गया है। हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में अडानी समूह की कंपनियों पर हेराफेरी का आरोप लगाया था। हालांकि अडानी ने आरोपों से इनकार किया है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा कि अडानी समूह भारत को व्यवस्थित ढंग से लंबे समय से लूट रहा है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयर तेजी से गिर गए। अडानी दुनिया के अमीरों की सूची में लुढ़कते हुए 20 टॉप उद्योगपतियों की सूची से भी बाहर हो गए।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रिजर्व बैंक और अन्य एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। रिजर्व बैंक ने कल शुक्रवार को ही इस बारे में बताया था कि उसने सभी सरकारी बैंकों से सूचनाएं मांगी हैं।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि रेगुलेटर अपना काम कर रहे हैं। आरबीआई ने बयान दिया। एलआईसी ने अपने एक्सपोजर (अडानी समूह को) के बारे में बताया। रेगुलेटर आजाद है, जो उचित है उसे करने के लिए सक्षम हैं ताकि बाजार अच्छी तरह से चलता रहे।

अडानी विवाद एक राजनीतिक फ्लैशप्वाइंट में बदल गया है। विपक्ष ने अदालत की निगरानी में जांच या आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति की जांच की मांग की है। वित्त मंत्री ने शुक्रवार को कहा था कि भारत का वित्तीय क्षेत्र बहुत अच्छी तरह से विनियमित है और मात्र एक उदाहरण से उसे हिलाया नहीं जा सकता। वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने भी शुक्रवार को कहा था कि व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से यह स्थिति बस “चाय के प्याले में तूफान” की तरह है। शनिवार को, उन्होंने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं।
हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद से अडानी कंपनियों के शेयरों की क़ीमतें धड़ाम गिरी हैं और इससे समूह का मूल्य क़रीब आधा ही रह गया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से अब तक क़रीब 120 बिलियन यानी 1.2 ख़रब डॉलर का नुक़सान हुआ है।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनियों पर स्टॉक में हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमने अपनी रिसर्च में अडानी समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों सहित दर्जनों व्यक्तियों से बात की, हजारों दस्तावेजों की जांच की और इसकी जांच के लिए लगभग आधा दर्जन देशों में जाकर साइट का दौरा किया। हालाँकि अडानी समूह ने उन आरोपों को खारिज कर दिया।
रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। अब भारतीय स्टॉक एक्सचेंज ने अडानी एंटरप्राइजेज सहित अडानी समूह की कम से कम तीन कंपनियों को बीएसई और एनएसई की निगरानी में डाल दिया है।अडानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और झटका लगने जा रहा है। S&P डाउ जोंस ने कहा है कि वह अडानी समूह की प्रमुख फर्म अडानी एंटरप्राइजेज को 7 फरवरी से अपने इंडेक्स से हटा देगा। डाउ जोंस ने तमाम मीडिया विश्लेषण और हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट आने के बाद पहली बार यह घोषणा की है।
]]>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बुधवार 1 फरवीर को थोड़ी देर में बजट पेश करने वाली हैं। केंद्रीय बजट 2023 इस साल बहुत मायने रखता है क्योंकि 2024 के आम चुनाव से पहले यह मोदी सरकार का आखिरी बजट है। 2019 के बाद से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पांचवीं बार सालाना बजट पेश कर रही हैं।
वित्त मंत्री निर्मला ने बजट 2023 पेश करने से पहले वित्त मंत्रालय गईं और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से औपचारिक मुलाकात कर बजट के बारे में सारी जानकारी दी। अब बजट को कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। वहां इसकी मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद वो जल्द ही वो संसद में बजट पेश करेंगी।
शेयर बाजार मजबूती के साथ खुला और इसका अर्थ ये है कि बजट को लेकर लोगों का रुख पॉजिटिव है। शेयर बाजार 60000 के करीब पहुंचा।
2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस कम टैक्स दर, जबरदस्त श्रम सुधार, सब्सिडी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी सहित अन्य क्षेत्रों पर रहा है। निर्मला सीतारमण ने कल मंगलवार को इस वित्त वर्ष के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया था। जिसमें कोविड महामारी के बाद भारत में आर्थिक सुधार पूरा होने का दावा किया गया है। आने वाले वित्त वर्ष 2023-24 में अर्थव्यवस्था के 6 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत के दायरे में बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि इस वित्त वर्ष में 7 फीसदी और 2021-22 में 8.7 प्रतिशत की तुलना में यह काफी कम है।
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