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Shri Goyal’s elevation comes at a crucial juncture for Uttar Pradesh, reflecting both the administration’s confidence in his leadership and the strategic importance of continuity in governance. Until this appointment, he served as Additional Chief Secretary to the Hon’ble Chief Minister, overseeing key portfolios such as Civil Aviation, State Property, and Protocol—roles in which he was credited with enhancing institutional efficiency and ensuring policy coherence.

A first-class mathematics graduate and holder of a Post Graduate Diploma in Computer Applications from IGNOU, Goyal brings a blend of analytical rigor and technological literacy to his work. His academic grounding has consistently informed his administrative style—marked by clarity in decision-making and a strong policy orientation.
Over a career spanning more than three decades, Goyal has held some of the most critical assignments in the state and at the Centre. His tenure as Joint Secretary in the Union Ministry of Human Resource Development (2014–2017) was particularly notable for policy reforms in higher education, earning him widespread recognition in national bureaucratic circles.

At the grassroots, Goyal built his reputation through impactful stints as District Magistrate in districts such as Aligarh, Allahabad, Etawah, Mathura, and Deoria. Known for hands-on governance, he led effective law and order management, disaster response, and citizen-centric initiatives—building a deep reservoir of administrative insight.
He has also served in key capacities including Principal Secretary of the UP State AIDS Control Society, Staff Officer in the Cabinet Secretariat, Secretary of the UP Public Service Commission, and other crucial state departments. In each role, he demonstrated his hallmark traits: measured leadership, systemic thinking, and a collaborative governance model.

In the aviation sector, Goyal’s stewardship as Principal Secretary and later Additional Chief Secretary has been central to Uttar Pradesh’s ambitious push for regional connectivity and aviation infrastructure—critical levers for economic expansion and investment inflow.
Respected across party lines and departments for his calm demeanor, incorruptible integrity, and results-driven approach, Goyal is seen as a steady hand on the administrative tiller. His colleagues describe him as a “visionary executor”—one who seamlessly balances macro policy vision with ground-level implementation.
With his appointment as Chief Secretary, Goyal assumes command of Uttar Pradesh’s sprawling bureaucratic machinery. His leadership will be key to ensuring governance stability, accelerating development agendas, and upholding administrative accountability in one of India’s most politically significant and populous states.

As the state eyes a future marked by infrastructure growth, industrial investment, and socio-economic transformation, Goyal’s track record suggests that Uttar Pradesh’s top bureaucrat is more than equal to the task.
]]>It’s heartening to see State Bank taking on its social responsibility by providing a ₹70.00 lakh check for free Accidental Death Insurance cover to the family of the account holder from Naubasta branch in Kanpur under the “Police Salary Package.” While the loss of Late Vijay Singh is deeply regrettable, such initiatives provide vital support and financial security to the grieving family.
The check was presented by Mrs. Shashi Yadav to Dr. Shri R.K., and this gesture demonstrates the bank’s commitment to its customers and their well-being during difficult times. It’s a commendable effort to provide a safety net for the families of account holders.
यह देखकर खुशी होती है कि स्टेट बैंक ने “पुलिस वेतन पैकेज” के तहत कानपुर की नौबस्ता शाखा से खाताधारक के परिवार को मुफ्त दुर्घटना मृत्यु बीमा कवर के लिए ₹70.00 लाख का चेक प्रदान करके अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई है। हालाँकि स्वर्गीय विजय सिंह का निधन बेहद अफसोसजनक है, लेकिन इस तरह की पहल शोक संतप्त परिवार को महत्वपूर्ण सहायता और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। यह चेक श्रीमती शशि यादव द्वारा डॉ. श्री आर.के. को प्रस्तुत किया गया और यह कठिन समय के दौरान अपने ग्राहकों और उनकी भलाई के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। खाताधारकों के परिवारों को सुरक्षा कवच प्रदान करना एक सराहनीय प्रयास है।
The presence of Shri Savarnakar, Police Commissioner, Kanpur, Shri Rajeev Rawat, Deputy General Manager, State Bank of India, Kanpur, and Shri Santosh Kumar, Regional Manager-2, adds significance to this occasion. Their involvement underscores the importance of this initiative to provide support to the family of the late account holder. It’s a collaborative effort between law enforcement and the banking sector to ensure the well-being and financial security of the community, even in the face of unfortunate events. This teamwork and commitment to social responsibility are truly commendable.
श्री स्वर्णकार, पुलिस आयुक्त, कानपुर, श्री राजीव रावत, उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, कानपुर और श्री संतोष कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक-2 की उपस्थिति इस अवसर को महत्व देती है। उनकी भागीदारी दिवंगत खाताधारक के परिवार को सहायता प्रदान करने की इस पहल के महत्व को रेखांकित करती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बावजूद भी समुदाय की भलाई और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून प्रवर्तन और बैंकिंग क्षेत्र के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है। यह टीम वर्क और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता वास्तव में सराहनीय है।………
]]>Vijay Vardhan has shown that one’s success is not determined by one’s failures. Making mistakes is a part of the success mantra. But, it is equally important that you do not justify your mistakes. Instead try to find out why the results did not come as expected. Vijay failed in 35 government exams. But these failures did not deter him for an iota. He died only after passing the examination of the collectorate. His story inspires millions. Come, let’s know about them here.

hold on to hope......Focus on accepting failures and moving on from them. If you work with dedication and honesty, you will definitely get success. Where some people get disheartened after failing in one or two exams. On the other hand, Vijay Vardhan, who belongs to Haryana, kept the thread of hope in spite of failing in 35 government exams He repeatedly failed in the examinations for government jobs. But, did not give up. Finally in 2018, he got success in securing 104th rank in UPSC.
Bureaucrats Magazine - Breaking News-keep learning from mistakes......Vijay Vardhan was not disheartened by repeated failures. However, keep learning from your mistakes. After every failure, he was evaluated honestly. He got elected as the first IPS officer. But, were not satisfied with this. He tried more. After all, he proved himself as an IAS officer.

Engineering in Electronics......]]>
#BureaucratsMag -सियासी गलियारों में ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि क्राइसेज मैनेजमेंट में माहिर इस अफसर के कंधों पर 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी देखने को मिल सकती है।
CA से करियर शुरू किया, ब्यूरोक्रेसी में शीर्ष तक का सफर तय किया
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में हर सरकार में चर्चित रहे 1988 बैच के आईएएस नवनीत सहगल पावर कॉरिडोर में ‘लंबे नारायण’ या ‘लंबू’ के नाम से मशहूर रहे। नवनीत पंजाब में लुधियाना के रहने वाले हैं। IAS बनने से पहले वो चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर बनने के बाद बैंलसशीट की तरह जिस तरह उन्होंने उत्तर प्रदेश को समझा और काम करके दिखाया ये अपने आप में एक उपलब्धि है।

नवनीत सहगल ने हर सरकार के नवरत्नों की सभा में खास जगह बनाए रखी।
Bureaucrats Magazine – Breaking News –अखिलेश, मायावती या योगी सरकार, वो नवरत्नों में शामिल रहे
क्राइसेस मैनेजमेंट में माहिर होने की वजह से अलग-अलग विचारधाराओं वाली सरकारों में नवनीत सहगल ने हमेशा सत्ता के साथ कदमताल किया। उनको सौंपे गए हर कार्य को किसी भी कीमत पर कर के दिखाया। मायावती, अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ की सरकार के नवरत्नों की सभा में उनका विशेष स्थान रहा। इन्होंने हमेशा राजा की खुशी के लिए सत्ता का दोहन और प्रदोहन किया। अपने मालिकों(मुख्यमंत्री) का हित साधने के लिए वो हर काम किए जिसे ना करने की एक प्रशासनिक अधिकारी शपथ लेता है।
Bureaucrats Magazine – Breaking News -कुर्सी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के चलते उनको सोशल मीडिया पर लोग “कटप्पा” भी कहने लगे थे। जो माहिष्मति के सिंहासन का वफादार था। वरिष्ठ पद पर होने के बाद भी पब्लिक सर्वेंट के रूप में नवनीत ने एक अलग पहचान बनाई। जनता उनसे मिलने दूर-दूर से आती थी। आगरा एक्सप्रेस-वे पर भीषण दुर्घटना के बाद अस्पताल में उनको देखने आने वालों का तांता लगा रहता था। जो किसी भी नौकरशाह के कामकाज की शैली को दर्शाने के लिए काफी था।

खेलो इंडिया इवेंट के दौरान राहुल बोस के साथ नवनीत सहगल का डिस्कशन चर्चा में रहा था।
सूचना विभाग के प्रमुख सचिव रहने के दौरान लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के भी चहेते रहे, कस्बाई रिपोर्टर से लेकर अखबार और चैनल मालिकों तक से मधुर संबंध बना कर चलने वाले अफसरों में शुमार होते हैं नवनीत सहगल। नेताओं में भी ख़ास लोकप्रियता रही, सही मायने में प्रशासनिक निष्ठुरता के साथ ब्राडिंग और डिलीवरी का सटीक मिश्रण नवनीत सहगल रहे हैं।
आगरा एक्सप्रेस-वे से लेकर कैलाश मानसरोवर यात्रा की दुर्घटना की जिम्मेदारी नवनीत को मिली
लखनऊ में कलेक्टर रहने के दौरान 6 दशक पुराने शिया सुन्नी विवाद को इतिहास के पन्नों में सीमित कर दिया इस अफसर ने, वरना यहां शिया सुन्नी दंगे होना आम बात थी। नवनीत सहगल की न्यायपालिका के साथ कभी भी किसी टकराव की स्थिति नहीं बनी। मायावती की सरकार के दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान दुर्घटना हुई थी, जिसमें कई लोग मर गए थे। उस वक्त मायावती ने घटनास्थल पर राहत कार्य की जिम्मेदारी इसी अफसर को सौंपी थी। धारचूला में जान जोखिम में डाल कर इस अफसर ने कई जिंदगियों को बचाया था।
पावर कॉरिडोर में एक चर्चा आम थी कि जो विभाग सबसे बेकार, मरा हुआ हो वो नवनीत सहगल को दे दो… कुछ महीनों बाद वो विभाग लहलहाने लग जाएगा। लखनऊ आगरा एक्सप्रेस को रिकार्ड 22 महीने में बनवाने और एअर फोर्स के फाइटर प्लेन को वहां उतारने का श्रेय भी इसी अफसर के नाम जाता है। राम मंदिर पर कोर्ट का फैसला आने के वक्त मायावती ने इस अफसर पर ही सबसे ज्यादा भरोसा किया और वो सही भी निकला, पूरे सूबे में शांति रही, छिटपुट घटना तक नहीं घटी।

खेलों इंडिया को यूपी में प्रमोट करने के पीछे नवनीत सहगल की अहम भूमिका रही है।
अब आपको नवनीत सहगल से जुड़े कुछ विवाद भी पढ़वाते हैं…
ताज कॉरिडोर से लेकर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगे
नवनीत सहगल के साथ विवादों का भी खासा नाता रहा है। मायावती सरकार में ताज कॉरिडोर मामला हो, लखनऊ में जेल को शिफ्ट करने के लिए सैकड़ों पेड़ काटने को लेकर पर्यावरण मंत्रालय की नाराजगी रही हो। मायावती की सरकार बनाने-गिराने में विधायकों की खरीद-फरोख्त का भी आरोप कई बार नेताओं ने इस अधिकारी पर लगाया।
अखिलेश सरकार में बिजली विभाग में दागी कंपनियों को काम देने का मामला रहा हो। मगर हर इल्जाम से बेदाग निकलते रहे नवनीत सहगल। ब्यूरोक्रेसी में एक पूरी लॉबी उनके खिलाफ लगी रही। मगर किसी तरह का साक्ष्य ना मिलने की वजह से नवनीत सहगल ने 35 साल अपने तरीके से काम किया।
]]>IAS Isha Duhan: तेज–तर्रार IAS अफसरों में होती है गिनती
हम बात कर रहें है महिला आईएएस ईशा दुहां (Isha Duhan) की, जो अभी हाल ही में यूपी के चंदौली जिले की की नई डीएम बनी है। ईशा दुहन की गिनती तेज-तर्रार आईएएस अधिकारियों में होती है। ईशा 2014 बैच की IAS Officer के रूप में बतौर डीएम पहली पोस्टिंग है। इससे पहले वह असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के रूप में मेरठ, मुख्य विकास अधिकारी के पद पर बुलंदशहर और मेरठ में काम कर चुकी हैं और वर्तमान में वाराणसी में वाराणसी विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष पद पर कार्य कर रही थी। ईशा की गिनती तेज–तर्रार आईएएस अफसरों में की जाती है तथा उन्हे कड़ी फैसले लेने के लिए जाना जाता है। अभी हाल ही में हुए तबादलों में ईशा दुहन (IAS Isha Duhan) को चंदौली की कमान सौंपी गयी है
हरियाणा की रहने वाली हैं IAS Isha Duhan
हरियाणा के पंचकुला की रहने वाली ईशा दुहन ने पटियाला से बी टेक बायोटेक्नोलॉजी करने के बाद सिविल सर्विसेज़ के क्षेत्र में जाने का निश्चय किया और पहले ही प्रयास में 59वीं रैंक हासिल किया। वाराणसी में लेडी सिंघम के नाम से मशहूर ईशा दुहन का नाम भू माफियाओं के लिए बुरे सपने से कम नहीं था

भू माफियाओं से अकेले लिया था लोहा

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बतौर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट वाराणसी के राजातालाब की SDM रहने के दौरान सरकारी तामझाम से दूर IAS Isha Duhan 2017 में अकेले ही खनन माफियाओं से लोहा लेने निकल पड़ी थी। ग्रामीणों की मदद से उन्हें पकड़ भी लिया। इसके अलावा राजातलाब तहसील में एसडीएम पद के दौरान एक व्यक्ति द्वारा पान खाकर उनके कक्ष में घुसना उसे भारी पड़ गया था। आईएएस ईशा दुहन ने उसे फटकारते हुए उसपर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

IAS ईशा दुहन का 17 अप्रैल 2018 को बनारस से तबदला हुआ था। उन्हें बुलंदशहर का सीडीओ बनाया गया था। ईशा दुहन ना सिर्फ एक तेज-तर्रार IASअफसर हैं, बल्कि वाराणसी जिला प्रशासन की ये युवा सदस्य भविष्य की काशी के निर्माण संबंधी योजनाओं में अहम भूमिका निभा चुकी हैं।
वीडीए उपाध्यक्ष रहने के दौरान कई अवैध निर्माणों पर बुल्डोजर चलवा चुकी हैं। दबंग लेडी IAS अफसर ईशा दुहन की जनता में छवि जनप्रिय अधिकारी के रूप में है। ईशा दुहन अपने पिता से काफी प्रभावित रहीं हैं। इनके पिता ईश्वर दुहन आईटीबीपी में डीआईजी रह चुके हैं।

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद सरकार घिरी हुई है। विपक्ष लगातार जांच की मांग कर रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार मुखर है। उसकी मांग है कि अडानी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में लगाए गये आरोपों पर संसदीय जांच कमेटी से जांच कराई जाए। बजट सत्र में इसको लेकर खूब हंगामा हुआ लेकिन सरकार ने अभी तक इस मांग को नहीं माना है।
इस सबसे इतर सुप्रीम कोर्ट में जांच के आदेश देने के लिए याचिकाएं दायर की गई हैं। अलग-अलग संस्थांये भी अडानी समूह की तमाम मसलों पर जांच कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को एक जांच समिति के गठन का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार द्वारा गठित की जाने वाली जांच समिति कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार की शर्तों पर बनी कोई जांच समिति शायद ही ईमानदारी से मुद्दे की जांज करे। जांच करने की बजाये यह जांच को भटका सकती है। इसका कारण अडाना और मोदी के निजि संबंध हैं। ऐसे में निस्पक्ष जांच की उम्मीद बेमानी है।
उन्होंने कहा कि जो आरोप लगाए गये हैं, वह सत्ता, भारत सरकार और अडानी समूह के बीच आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार द्वारा प्रस्तावित शर्तों के साथ बनी जांच समिति से स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की उम्मीद बहुत कम है।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को हिंडनबर्ग-अडाणी मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ स्तर की समिति के गठन के सुझाव को स्वीकार किया था, इस जांज समिति के गठन पर केंद्र सरकार की भी सहमति थी। सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह जल्द ही समिति के लिए विशेषज्ञों के नाम सुझाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की तरफ से कहा था कि हम सीलबंद लिफाफे में समिति में शामिल किए जाने वाले विशेषज्ञों के नाम सुझाएंगे। याचिकाकर्ताओं द्वारा इन नामों पर चर्चा और विरोध नहीं किया जाना चाहिए। “सुप्रीम कोर्ट सूची में से जांच दल के सदस्यों के नाम चुन सकता है।
रमेश ने समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि मेहता का सीलबंद लिफाफे में नाम देने का सुझाव इस बात को पुख्ता करता है कि प्रस्तावित समिति सरकार और अडानी समूह के संबंधों की वास्तविक जांच को रोकने के लिए पूर्व योजना का हिस्सा है।
उन्होंने 2001 में शेयर बाजार घोटाले सहित कई औऱ महत्वपूर्ण मामलों की जांच में जेपीसी की भूमिका को याद करते हुए कहा कि इन समितियों की रिपोर्टों ने बहुत सारी गलत प्रथाओं को रोकने में सहायता दी। अगर सरकार और प्रधानममंत्री को जवाबदेह बनाया जाए तो जेपीसी के गठन के अलावा और कोई भी जांच समिति लीपापोती के अलावा और कुछ नहीं है।
जयराम रमेश ने जांच समिति के गठन और उसमें सरकार की भूमिका पर अविश्वास जताते हुए सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। उनकी बात एक हद तक सही भी है कि जब किसी गंभीर मामले की जांज करने के लिए संसदीय व्यवस्था में ही प्रावधान किए गये हैं तब सरकार उन समितियों से जांच कराने से भाग क्यों रही है। जबकि ऐसा पहली बार नहीं है कि इस तरह की मांग उठी हो।
लगभग हर सरकार के सामने कोई ऐसी स्थिति आती है जब उसे इस तरह के हमलों का सामना करना पड़ता है। खुद भाजपा जब विपक्ष में थी उसने न जाने कितनी बार कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए जेपीसी से जांच की मांग को उठाया। और सरकार ने भी विपक्ष की बात मानते हुए इसका गठन किया। समिति की रिपोर्टों के बाद कई मंत्रियों को इस्तीफे तक देने पड़े। मोदी की अगुवाई वाली भाजपा में सरकार किसी का इस्तीफा तो छोड़िए, जांच समिति का गठन हो जाए यही बहुत बड़ी बात है।
लोकतांत्रिक परंपरा में पक्ष विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहते हैं, यह राजनिती का हिस्सा है लेकिन किसी गंभीर मसले पर एक दूसरे की बात मानकर आगे बढ़ने की परंपराएं भी रही हैं। और सबको साथ लेकर चलना लोकतंत्र का तकाजा भी है। लेकिन विपक्ष द्वारा सरकार पर इस तरह का अविश्वास भी शायद ही कभी दिखाया गया हो।
]]>पुरुष प्रधान दुनिया में अगर हर महत्वपूर्ण पद पर महिला बैठी हो तो आप क्या कहेंगे? ऐसा हुआ है कानपुर देहात जिले में। यहां इस समय ज्यादातर महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही हैं। डीएम नेहा जैन, एसपी सुनीति, सीडीओ सौम्या पांडेय, कई एसडीएम, बीएसए और जिला पंचायती राज अधिकारी भी महिला हैं। ‘ऑल विमिन टीम’ की सदस्य एसपी सुनीति कहती हैं, किसी महत्वपूर्ण पद पर महिला अधिकारी के होने से समन्वय बढ़िया होता है। कोशिश रहती है कि अच्छा कर पाएं।
बात समझाना होता आसान:
कुछ साल पहले डीएम, एसपी और सीडीओ के पद पर महिलाओं की तैनाती के बाद उन्नाव जिला चर्चा में आया था। बीते दिनों एसपी के पद पर आईपीएस अधिकारी सुनीति की तैनाती के बाद जानकारों की नजर कानपुर देहात जिले पर गईं। अब ज्यादातर महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं हैं। बातचीत में पुलिस-प्रशासन से जुड़ी सारी महिला अधिकारी इस बात पर खुशी जताती हैं। हर अधिकारी का कहना है कि दूसरे किसी पद पर महिला अधिकारी के होने से अपनी बात कहना और समझाना काफी आसान हो जाता है।

अच्छा है समन्वय:
एसपी सुनीति कहती हैं कि मेरी इस बारे में डीएम नेहा जैन से चर्चा भी हुई है। हम चाहते हैं कि चीजें और बेहतर हों। जिले के लिए कुछ अच्छा कर पाना जरूरी है। लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हर चुनौती जीवन का अंग है। वह कहती हैं, जब औरैया में एसपी थी तो बेटा 8 महीने का था। इस वक्त बेटी 9 महीने की है। मैं जिले के साथ परिवार को भी मैनेज कर लूंगी। परिवार के सहयोग से सब कर पा रही हूं।
काम करने में आसानी:
सीडीओ सौम्य पांडेय भी इसे एक अवसर की तरह देखती हैं, वह कहती हैं, महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। मैं भाग्यशाली हूं कि इस टीम का हिस्सा हूं। महिलाओं के लिए बनाए आगे बढ़ रही हैं। मैं भाग्यशाली हूं कि इस टीम का हिस्सा हूं। महिलाओं के लिए बनाए
यूपीसीडा में थी अपर कार्यपालक पद पर तैनात
कानपुर देहात की नवागत जिलाधिकारी बनीं 2014 बैच की आईएएस नेहा जैन यूपीसीडा में अपर कार्यपालक पद पर तैनात थीं। पूर्व में ट्रेनिंग के दौरान वह आगरा तैनात रही हैं। इसके बाद उन्होंने लखनऊ में एसडीएम व फिरोजाबाद में मुख्य विकास अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। उनके साथ काम करने वाले लोगों ने बताया कि वह अपने काम के प्रति बेहद ईमानदार है और हर काम समय पर करने कि उनकी आदत है।
कानपुर से है गहरा नाता
कानपुर देहात की नवागत जिलाधिकारी बनी नेहा जैन का कानपुर से बहुत गहरा नाता है। कानपुर में उनकी पूरी स्कूलिंग हुई है। उनके माता-पिता कानपुर में ही रहते हैं। उनके पिता आर.सी गोयल वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं।उनका स्वभाव मिलनसार एवं मृदुभाषी है। वह बेहद ईमानदार व सरल स्वभाव की हैं।
]]>सेबी ने कहा कि वह बाजार के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदार संस्था होने के नाते बाजार को व्यवस्थित और कुशल कामकाज को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। एक विशेष समूह के शेयरों में चल रही अत्यधिक अस्थिरता को दूर करने के लिए पहले से परिभाषित और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध निगरानी उपायों (एएसएम ढांचे सहित) को लागू कर रहा है। किसी भी स्टॉक की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की कुछ शर्तों के तहत यह तंत्र ऑटोमेटिक रूप से लागू हो जाता है।
स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई ने अडानी समूह की तीन कंपनियों – अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अंबुजा सीमेंट्स को अपने अल्पकालिक अतिरिक्त निगरानी उपाय (एएसएम) के तहत रखा है।
सेबी का यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान के घंटों के भीतर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘अडानी एंटरप्राइजेज पर यूएस-आधारित लघु विक्रेता हिंडनबर्ग के “स्टॉक हेरफेर” आरोपों के बाद 20,000 करोड़ रुपये के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को रद्द करने के बाद भारत की मैक्रो फंडामेंटल और छवि प्रभावित नहीं हुई है। देश की की मजबूत धारणा बरकरार बनी हुई है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि अडानी के मुद्दे पर नियामक अपना काम करेंगे और उनके पास बाजारों की स्थिरता सुनिश्चित करने के साधन हैं। सीतारमण ने कहा कि नियामक सरकार से स्वतंत्र हैं, और “बाजार को अच्छी तरह से विनियमित करने के लिए जो उचित है उसे करने के लिए उन्हें खुद पर छोड़ दिया गया है। हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में अडानी समूह की कंपनियों पर हेराफेरी का आरोप लगाया था। हालांकि अडानी ने आरोपों से इनकार किया है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा कि अडानी समूह भारत को व्यवस्थित ढंग से लंबे समय से लूट रहा है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयर तेजी से गिर गए। अडानी दुनिया के अमीरों की सूची में लुढ़कते हुए 20 टॉप उद्योगपतियों की सूची से भी बाहर हो गए।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रिजर्व बैंक और अन्य एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। रिजर्व बैंक ने कल शुक्रवार को ही इस बारे में बताया था कि उसने सभी सरकारी बैंकों से सूचनाएं मांगी हैं।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि रेगुलेटर अपना काम कर रहे हैं। आरबीआई ने बयान दिया। एलआईसी ने अपने एक्सपोजर (अडानी समूह को) के बारे में बताया। रेगुलेटर आजाद है, जो उचित है उसे करने के लिए सक्षम हैं ताकि बाजार अच्छी तरह से चलता रहे।

अडानी विवाद एक राजनीतिक फ्लैशप्वाइंट में बदल गया है। विपक्ष ने अदालत की निगरानी में जांच या आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति की जांच की मांग की है। वित्त मंत्री ने शुक्रवार को कहा था कि भारत का वित्तीय क्षेत्र बहुत अच्छी तरह से विनियमित है और मात्र एक उदाहरण से उसे हिलाया नहीं जा सकता। वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने भी शुक्रवार को कहा था कि व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से यह स्थिति बस “चाय के प्याले में तूफान” की तरह है। शनिवार को, उन्होंने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं।
हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद से अडानी कंपनियों के शेयरों की क़ीमतें धड़ाम गिरी हैं और इससे समूह का मूल्य क़रीब आधा ही रह गया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से अब तक क़रीब 120 बिलियन यानी 1.2 ख़रब डॉलर का नुक़सान हुआ है।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनियों पर स्टॉक में हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमने अपनी रिसर्च में अडानी समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों सहित दर्जनों व्यक्तियों से बात की, हजारों दस्तावेजों की जांच की और इसकी जांच के लिए लगभग आधा दर्जन देशों में जाकर साइट का दौरा किया। हालाँकि अडानी समूह ने उन आरोपों को खारिज कर दिया।
रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। अब भारतीय स्टॉक एक्सचेंज ने अडानी एंटरप्राइजेज सहित अडानी समूह की कम से कम तीन कंपनियों को बीएसई और एनएसई की निगरानी में डाल दिया है।अडानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और झटका लगने जा रहा है। S&P डाउ जोंस ने कहा है कि वह अडानी समूह की प्रमुख फर्म अडानी एंटरप्राइजेज को 7 फरवरी से अपने इंडेक्स से हटा देगा। डाउ जोंस ने तमाम मीडिया विश्लेषण और हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट आने के बाद पहली बार यह घोषणा की है।
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